समझौता ब्लास्ट मामले में पाकिस्तानी अर्जी से आया नया मोड़ (Video)
पंचकूला। (उमंग श्योराण) बहुचर्चित समझौता ब्लास्ट केस में अंतिम क्षणों में फैसला आते-आते रुक गया। पाकिस्तान की एक महिला ने अपने वकील के जरिए सेक्शन 311 के तहत एनआईए अदालत में एक अर्जी दायर की है। इस अर्जी के जरिए उन्होंने दलील दी है कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों को गवाही देने का अवसर नहीं मिला है और ना ही उन तक समन तामील हुए हैं। ऐसे में एक बार उन्हें गवाही का मौका दिया जाए। अदालत ने अब इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए 14 मार्च का दिन मुकर्रर किया है। अब अदालत 14 मार्च को यह तय करेगी कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों को सुनवाई का मौका दिया जाए या फिर इस केस को अंजाम तक पहुंचाया जाए।
[caption id="attachment_268227" align="aligncenter" width="549"] अदालत ने अब इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए 14 मार्च का दिन मुकर्रर किया है।[/caption]
गौरतलब है कि 17 फरवरी 2007 को पाकिस्तान जा रही समझौता एक्सप्रेस में पानीपत के पास जबरदस्त ब्लास्ट हुआ और इसमें पांच भारतीय नागरिकों समेत 68 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 16 बच्चे भी शामिल थे। हादसा इतना भीषण था 19 मृतकों की शिनाख्त नहीं हो पाई। एनआईए ने मामले की जांच में 8 लोगों को आरोपी बनाया। इनमें स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी व कमल चौहान के खिलाफ यह मुकदमा एनआईए कोर्ट में चल रहा था, जबकि तीन आरोपी पहले ही भगोड़े करार दिए जा चुके हैं और एक आरोपी की मौत हो चुकी है।
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दोनों पक्षों की दलीलों और 200 से भी ज्यादा गवाहों की गवाही के बाद अदालत अब फैसले के काफी करीब पहुंच गई थी। सोमवार को इस मामले में फैसला सुनाए जाने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन ऐन मौके पर हरियाणा के एक वकील मोमिन मलिक ने अदालत में अर्जी लगाई। यह अर्जी पाकिस्तान की एक महिला वकील रहिला ने उन्हें ईमेल के जरिए भेजी है।
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हरियाणा के एक वकील मोमिन मलिक ने अदालत में लगाई है अर्जी[/caption]
दरअसल रहीला के पिता की इस बलास्ट में मौत हो गई थी। महिला ने इस ईमेल के जरिए कहा है कि पाकिस्तान के पीड़ित परिवारों को इस मामले में गवाही का मौका नहीं दिया गया है और यदि कोई समन भेजे गए हैं तो वह तामील नहीं हुए हैं। इसलिए पीड़ित परिवारों को गवाही का एक मौका दिया जाए। कई परिवार इस मामले में गवाही देना चाहते हैं।
अदालत ने इस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए 14 मार्च का दिन मुकर्रर किया है अब 14 मार्च को तय होगा कि आखिर पाकिस्तान के इन गवाहों को गवाही का मौका मिलेगा या फिर अदालत अब तक की चली सुनवाई के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी।
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