हरियाणा का जवान आतंकियों से लोहा लेते शहीद, शहादत से पहले एक आतंकी को मार गिराया
करनाल। 50 राष्ट्रीय राईफल में हवलदार के पद पर तैनात डिंगर माजरा गांव के बलजीत सिंह श्रीनगर के पुलवामा में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। इसकी पुष्टि घरौंडा के उपमंडलाधीश मो. इमरान रजा व जिला सैनिक बोर्ड के सचिव प्रमोद कुमार यादव ने की है। सैनिक बलजीत सिंह के शहीद होने के सूचना जैसे ही पैतृक गांव पहुंची तो गांव स्तब्ध रह गया। जानकारी के मुताबिक सैनिक का बुधवार सुबह राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव डिंगर माजरा में अंतिम संस्कार होगा।
परिवार से प्राप्त जानकारी अनुसार हवलदार बलजीत सिंह इस समय श्रीनगर के पुलवामा में 50 राष्ट्रीय राईफल में तैनात थे। गत रात्रि को 2.30 बजे सेना के जवानों को पुलावामा के पास तीन आतंकवादियों के घुसे होने की सूचना पहुंची, तो वह अपने साथी जवानों के साथ आतंकवादियों की घेराबंदी के लिए पहुंचे। इस दौरान आतंकवादियों को सेना के निकट आने की भनक लग गई और अपनी ओर से अंधेरे में फायर शुरू कर दिए। इधर हवलदार बलजीत अपने ऑफिसर जे.सी.ओ. के साथ सर्च अभियान की अगुवाई में शामिल थे।
[caption id="attachment_255289" align="aligncenter" width="700"] जवानों के साथ आतंकवादियों की घेराबंदी के लिए पहुंचे थे बलजीत सिंह[/caption]
इस मुठभेड़ में बलजीत ने एक आतंकवादी को फायर कर मार गिराया, लेकिन सामने से आतंकवादियों की फायरिंग में बलजीत सिंह को दो गोली लगी व एक अन्य साथी सिपाही को गोली लगी। जिसके बाद साथी सैनिक दोंनो गोली लगने से घायल जवानों तो तुरंत सेना के अस्पताल को लेकर पहुंचे। लेकिन तब तक हवलदार बलजीत व उसका दूसरा साथी सिपाही शहीद हो चुके थे।
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जानकारी के मुताबिक हवलदार बलजीत सिंह जनवरी 2002 में 2 मैक इनफैंटरी में भर्ती हुए थे। उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर में ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद अपनी अच्छी फिटनैस के चलते हवलदार बलजीत ने एन.एस.जी.कमांडो की ट्रेनिंग पूरी की थी व वर्ष 2015 से वर्ष 2017 तक नई दिल्ली में एन.एस.जी.में वी.वी.आई.पी.डयूटी में तैनात रहे। इससे पहले भी तीन साल तक हवलदार बलजीत राष्ट्रीय राईफल में पोस्टिंग पर रह चुके थे। अब दोबारा से लगभग पिछले तीन वर्षों से 50 राष्ट्रीय राईफल में श्रीनगर क्षेत्र में तैनात थे।
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हवलदार बलजीत का एक तीन वर्षीय बेटा व सात वर्षीय बेटी है। देश के लिए शहादत देने वाले हवलदार बलजीत की पत्नी अरूणा उनकी शहादत की खबर पाकर बेसुध हो गई हैं। पिता ने सूचना मिलने पर कहा कि वह तो फोन पर छुट्टी मिलने की बात कह रहा था। पत्नी अरूणा ने कहा कि एक दिन पहले ही मुझसे व बच्चों से बात हुई थी, दिपावली पर एक महीने की छुट्टी गांव में परिवार के साथ बिताकर वो गए थे।