पूर्व मंत्री पंडित सुखराम का हुआ अंतिम संस्कार, 1995 में भारत में पहला मोबाइल कॉल किया था रिसीव
राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले और संचार क्रांति के मसीहा पंडित सुखराम आज अंतिम संस्कार कर दिया गया। आज उनकी पार्थिव देह को सेरी मंच पर लोगों के दर्शनों के लिए रखा गया था। उनके अंतिम दर्शनों के लिए सेरी मंच पर लोगों का तांता लग गया।
उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मंडी में सुबह ही नेताओं व समर्थकों की खूब भीड़ देखी गई। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सहित भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी पंडित सुखराम को आखिरी विदाई दी। हिमाचल के कैबिनेट महेंद्र सिंह ठाकुर, सुरेश भारद्वाज सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर, नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर व अन्य ने श्रद्धांजलि दी।
डेढ़ बजे के बाद सेरी मंच से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। ब्यास नदी के किनारे हनुमानघाट पर उनकी अंतिम यात्रा पहुंची। यहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने उनकी चिता को आग्नि दी।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि पंडित सुखराम को देश में दूरसंचार क्रांति लाने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। नवाचार के लिए हमेशा तत्पर पंडित सुखराम के रूप में देश और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश ने एक महान नेता खो दिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि पंडित सुख राम ने अपने साठ वर्षों के लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान हिमाचल प्रदेश के विकास और यहां के लोगों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उनके योगदान के लिए राज्य की जनता उन्हें हमेशा याद रखेगी।
बता दें कि पंडित सुखराम को दूरसंचार क्रांति का जनक माना जाता है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रहते हुए उन्होंने गांव गांव में टेलिफोन को पहुंचाया था। उनका नाम दूरसंचार घोटाले के साथ भी जुड़ा था। सीबीआई ने उनके घर से करोड़ों रुपये बरामद किए थे।
वह 1993 से 1996 तक दूरसंचार मंत्री थे। 31 जुलाई 1995 को भारत में मोबाइल कॉल की गई थी। मोबाइल से यह बातचीत केंद्रीय दूरसंचार मंत्री सुखराम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु के बीच हुई थी। सुखराम भारत के पहले शख्स थे जिन्होंने पहला मोबाइल कॉल रिसीव किया था। बीते कल दिल्ली एम्स में उनका निधन हो गया था।