कुरुक्षेत्र के चौदस मेले के लिए तैयारियां हुई पूरी, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
जो श्रद्धालु आज यानी 27 मार्च को पहुंचे हैं, वे रात भर रुककर कल मुख्य स्नान के बाद पिंडदान और तर्पण करेंगे। चतुर्दशी को पिशाच मोचनी चौदस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पितरों की आत्मा को मुक्ति देने के लिए श्रद्धालु स्नान, ध्यान, पिंडदान, गति कर्म, तर्पण और दीपदान करेंगे

कुरुक्षेत्र: पिहोवा में पवित्र सरस्वती तीर्थ पर चैत्र चौदस का भव्य मेला श्रद्धा और आस्था के साथ आरंभ हो चुका है। देशभर से पहुंचे श्रद्धालु पवित्र स्नान, पिंडदान और तर्पण से अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारी पूरी की गई है।
जो श्रद्धालु आज यानी 27 मार्च को पहुंचे हैं, वे रात भर रुककर कल मुख्य स्नान के बाद पिंडदान और तर्पण करेंगे। चतुर्दशी को पिशाच मोचनी चौदस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पितरों की आत्मा को मुक्ति देने के लिए श्रद्धालु स्नान, ध्यान, पिंडदान, गति कर्म, तर्पण और दीपदान करेंगे। माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आपको बता दें कि चतुर्दशी के दिन श्रद्धालु पवित्र सरस्वती तीर्थ में स्नान कर अपने पितरों के मोक्ष की कामना करेंगे। इसके बाद अमावस्या के दिन भी तीर्थ में स्नान का विशेष महत्व है।
श्रद्धा और आस्था का महासंगम पिहोवा का यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी है। मान्यता है कि यहां स्नान और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मेला हिंदु-सिख एकता का प्रतीक है, क्योंकि मेले में अधिकतर सिख श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं। पुराने समय से परंपरा चलती आ रही है।